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मलंजखण्ड कॉपर प्रोजेक्ट (एमसीपी), मलंजखण्ड, मध्य प्रदेश

मलंजखण्ड ताम्र क्षेत्र ग्रैनाइटिक प्रकार की चट्टानों से परिपूर्ण है, जिनकी संरचना में डायोराइट से ग्रैनाइट प्रकार तक की भिन्नता है। यहाँ के प्रमुख भण्डार हैं – मलंजखण्ड, शीतलपानी (बालाघाट, मध्य प्रदेश), गिधरी ढोरली, जट्टा एवं गढ़ी डोंगरी।

उत्पत्ति

मलंजखण्ड कॉपर प्रोजेक्ट की स्थापना सन् 1982 में हुई । शुरुआती दौर में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड ने इसे खुली खानों में से खनन द्वारा तांबे प्राप्ति के लिए बनाया था । जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने सन् 1969 में इस भण्डार की खोज का कार्य प्रारम्भ किया था । अयस्क के खनन का पट्टा हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड को 1973 के दौरान  मिला था । समय के साथ-साथ इस परियोजना में अन्य लाभदायक प्रचालनों का कार्य भी प्रारम्भ किया गया।

आज, खुली खानों एवं सांद्रक संयंत्र के अलावा परियोजना में अन्य सहयोगी व्यवस्थाएँ हैं, जैसे कि – टेलिंग्स डिस्पोज़ल एण्ड वाटर रीक्लेमेशन सिस्टम, रिपेयर शॉप, मेन्टेनेन्स गैरेज, वाटर ट्रीटमेन्ट प्लाण्ट, गोदाम, फ्युअलिंग स्टेशन, 132केवी पावर सब-स्टेशन, वेस्ट ट्रीटमेन्ट व्यवस्था तथा आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण एक टाउनशिप ।

वर्तमान आधारभूत ढाँचा

स्थापना सन 1982
भारत का सबसे बड़ा ताम्र भण्डार
2 मिलियन टन प्रति वर्ष अयस्क की क्षमता वाली खुली खान, जिसकी क्षमता के अनुरूप ही सांद्रक संयंत्र, टेलिंग डिस्पोज़ल सिस्टम एवं अन्य व्यवस्थाएँ है।

अयस्क भण्डार (स्त्रोतों सहित)

मलंजखण्ड खान : 221.00 मिलियन टन  @ 1.31% ताम्र

वर्तमान उत्पादन क्षमता

मलंजखण्ड के ताम्र भण्डार, जो कि कान्हा राष्ट्रीय उद्यान से 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं, भारत का एकल सबसे बड़ा ताम्र भण्डार है, जिसमें देश भर के भण्डार का लगभग 70% अंश  है तथा यह एचसीएल के कुल ताम्र उत्पादन में लगभग 80% का योगदान करता है।

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