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इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स (आईसीसी), घाटशिला, झारखण्ड

सिंहभूम के तांबा क्षेत्र (एससीबी) में एक प्रकार की प्रोटेरोज़ोइक वॉल्कैनो-सेडिमेन्टरी चट्टान होती है, जो कि एससीबी नामक एक शीयर ज़ोन की रचना करती है जिसे सिंहभूम शीयर ज़ोन कहा जाता है । एससीबी में तांबे के अयस्कों का एकत्रीकरण इसी शीयर ज़ोन के आसपास ही होता है । चापरी, राखा, सुरदा, केन्दाडीह, पाथरगोड़ा एवं धोबानी के बड़े एससीबी अयस्क भण्डार इसी शीयर ज़ोन में स्थित हैं । इनके अलावा अन्य भण्डार हैं : तुरमडीह, रामचन्द्रपुर, नान्दुप, बायानबिल एवं धदकीडीह (सिंहभूम, झारखण्ड) ।

उत्पत्ति

इंडियन कॉपर कॉर्पोरेशन लि. की स्थापना सन 1930 में एक ब्रिटिश कम्पनी द्वारा घाटशिला में की गई थी, जिसमें कुछ भूमिगत खाने, सांद्रक संयंत्र एवं स्मेल्टर थे। भारत सरकार नें 25.09.1972 को इंडियन कॉपर कॉर्पोरेशन (उपक्रम अधिग्रहण अधिनियम) के प्रावधानों के तहत इस कम्पनी का राष्ट्रीकरण किया तथा इसे एचसीएल में समाहित कर दिया । आज यह झारखण्ड राज्य के पूर्व सिंहभूम जिले के अंतर्गत है।

वर्तमान आधारभूत ढाँचा

  • सन् 1930 में स्थापित
  • प्रचालनरत खान : सुरदा ~26 मी.ट. @ 1.20% ताम्र
  • प्रक्रिया संयंत्र जिनसे 19,000 टन प्रति वर्ष परिशोधित तांबे का उत्पादन होता है।

अयस्क भण्डार, स्त्रोतों सहित

अतिरिक्त खनन भण्डार (पुरानी खानें)

राखा खान – 47.19 मिलियन टन @ 0.97% ताम्र
केन्दाडीह खान – 12.85 मिलियन टन @1.73% ताम्र
चापरी ब्लॉक – 63.50 मिलियन टन @1.14% ताम्र

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