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निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों के लिए आचार-संहिता परिचय

कंपनी की साख उसके निदेशकों तथा कार्यपालकों के आचार पर निर्भर होती है, जिसके लिए उन्हें उच्चतम स्तर के नैतिक मापदण्डों का पालन करना चाहिए।  आचार-संहिता व्यवहार का परिलक्षित दिशा-निर्देश है। किसी कंपनी के निदेशक मण्डल तथा प्रबंधन के उच्च अधिकारियों की आचार-संहिता व्यावसायिक संस्कृति (कॉर्पोरेट कल्चर) को बनाए रखने में सहायता करती है जिसके माध्यम से उस प्रतिष्ठान तथा उसके वरिष्ठ पदाधिकारियों द्वारा उच्चतम नैतिक दायित्व का पालन करने में सहायता मिलती है। एक प्रभावी आचार-संहिता  के अनुसार निदेशक मण्डल के हरेक सदस्य तथा प्रबंधन के उच्च अधिकारी  व्यावसायिकता, ईमानदारी तथा चारित्रिक दृढ़ता के साथ-साथ गैर-पक्षपाती, स्वच्छता एवं बराबरी के मापदण्ड प्रदर्शित करें।

लिस्टिंग अग्रीमेन्ट के  अनुच्छेद 49 के उप-अनुच्छेद 1(डी) के अनुसार व्यावहारिकता के लिए  एक आदर्श आचार-संहिता बनाई गई है ताकि आधारभूत मूल्यों  के अनुसार आचरण हो सके। यह आचार-संहिता निर्दिष्टपरिस्थितियों के अनुसार बनाए गए महज नियम ही नहीं हैं, बल्कि सिद्धान्तों के आधार पर विस्तृत व्याख्या द्वारा विशेष रूप  से बनाई गई है ताकि हरेक कार्मिक को हर  गतिविधि के फल का ज्ञान हो सके। निदेशक मण्डल तथा प्रबंधन के वरिष्ठ कार्यपालकों को इन सिद्धान्तोंका अध्ययन करना चाहिए तथा क्षमतानुसार प्रयास करना चाहिए कि हरेक परिस्थिति में इन पर अमल किया जा सके। इस प्रक्रिया का कुल मिलाकर एक सीधा सा उद्देश्य है - कार्य के दौरान क्षमतानुसार उच्चतम नैतिकता का पालन किया जाय।

इस संहिता के अंत में जवाब-पत्र को उच्च प्रबंधनकार्मिकों द्वारा भर कर कार्मिकविभाग अथवा मुख्यालय को वापस दिया जाना चाहिए, जिससे यह सूचित हो कि इन्होंने इसे पाया, पढ़ा तथा समझ लिया है और संहिता के अनुसार कार्य करने को सहमत हैं। हस्ताक्षरित जवाब हर अधिकारी की व्यक्तिगत फाइल में  रखा जाएगा।


इस आचार संहिता क  अधीन होंगे -

क.    हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (कंपनी) के सभी निदेशक तथा
ख.    कंपनी के सभी वरिष्ठ प्रबंधन कार्मिक, अर्थात् कार्यरत महाप्रबंधक तथा इनसे उच्च अधिकारी  जिनके अधीन कंपनी के व्यवसाय में ईमानदारी,  तरीकों तथा प्रचालन एवं वित्तीय क्षमता को प्रभावित करने  योग्य अधिकार दिए गए हैं।

लिस्टिंग अग्रीमेन्ट के अनुसार सालाना बोर्ड के हर सदस्य तथा वरिष्ठ प्रबंधन कार्मिक को संहिता के पालन का ज्ञापन देना चाहिए। इस विषय में वार्षिक रिपोर्ट में एक ज्ञापनकंपनी के अध्यक्षव प्रबंध निदेशक द्वारा हस्ताक्षरितहो जारी किया  जाना चाहिए ।


उद्देश्य

कंपनी की साख उसके निदेशकों, वरिष्ठ कार्यपालकों तथा कार्मिकों के आचरण पर आधारित होती है। कंपनी से जुड़े हर कार्मिक को एचसीएल के उच्चतम नैतिक मानदण्ड को बनाए रखने में प्रयारत रहना चाहिए।

स्टॉक एक्सचेन्ज में  प्रयोज्य लिस्टिंग  एग्रीमेन्ट के  अलावा इस आचार-संहिता का उद्देश्य है -

क.    निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों में ईमानदारी, चारित्रिक दृढ़ता, नैतिक व न्यायसंगत आचरण  के उच्च मानदण्डों को बनाना।

ख.    इन मानदण्डों को बनाए रखने को बढ़ावा देना ताकि सभी साझेदारों तथा अन्य हिस्सेदारों ( जैसे  कि - कार्मिक, ग्राहक, आपूर्तिकारक, निवेशक एवं सारा समाज) के भाग की रक्षा हो तथा बढ़ोत्तरी की जा सके।

ग.    निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों को  कंपनी की चारित्रिक दृढ़ता को बनाए रखने के लिए दिशा-निर्देश, तथा

घ.    इस संहिता के पालन में हुई चूक , अनैतिक अथवा गैर-न्यायसंगत कार्य के मामले में रिपोर्ट अथवा जाँच करने के लिए निदेशकों एवं वरिष्ठ कार्यपालकों के दायित्व तथा जवाबदेही की रूप-रेखा बनाना।

हर नैतिक परिस्थिति का विवरण एवं ब्यौरा दे पाना संभव नहीं होता है। ऐसे में निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों को अपने  स्तर  के व्यक्ति से अपेक्षित विचार, न्याय-क्षमता तथा कार्यकुशलता के अनुसार  काम करना चाहिए।

इस आचार-संहिता द्वारा एचसीएल के निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों को उनसे अपेक्षित आचरण  के लिए साधारण दिशा-निर्देश (आपसी मतभेद की परिस्थिति सहित) दिए गए हैं।


विशेषताएं

इस आचार-संहिता में निदेशकों तथा वरिष्ठ कार्यपालकों द्वारा पालन किए जाने वाले निम्नलिखित दिशा-निर्देश हैं

1. ईमानदारी तथा चारित्रिक दृढ़ता  

कंपनी अपने हरेक निदेशक तथा वरिष्ठ कार्यपालक से आशा करती है कि -

क.    ईमानदारी, चारित्रिक-दृढ़ता एवं नैतिक व न्यायसंगतआचरण करें जब वे - 

(1)         अपना दायित्व-निर्वाह कर रहे हों, तथा

(2)         ऑफिसरों, कार्मिकों, निवेशकों,  धारकों, आपूर्तिकारकों, लेखा-परीक्षकों, वकीलों, कंपनी तथा सरकार के अन्य सलाहकारों आदि से व्यवहार कर रहे हों, तथा

(ख) अन्य ऑफिसरों तथा कार्मिकों के बीच ईमानदारी, चारित्रिक - दृढ़ता एवं नैतिक व न्यायसंगत आचरण की संस्कृति को बढ़ावा दें।

2.आपसी अथवा दायित्व में  मतभेद

2.1 प्रत्येक निदेशक अथवा वरिष्ठ कार्यपालक को आपसी मतभेद के मुद्दे ज्ञात रहने चाहिए (परोक्ष अथवा अपरोक्ष)

क. एक तरफ

(1)         कंपनी के लाभ या

(2)        कंपनी के प्रति उनके दायित्व तथा

ख. दूसरी तरफ

(1)         उनके व्यक्तिगत अथवा बाहरी व्यवसाय या

(2)        किसी तीसरे पक्ष के प्रति उनके दायित्व

2.2 प्रत्येक निदेशक अथवा वरिष्ठ कार्यपालक को स्वयं को किसी भी ऐसी परिस्थिति में पड़ने से बचाए रखना चाहिए जिससे -

क) सम्भाव्य य  अवश्यम्भावी दायित्व में मतभेद या दायित्व-पूर्ति में  खलल  हो,

ख)   एक सम्भाव्य य  अवश्यम्भावी दायित्व में मतभेद या दायित्व-पूर्ति में   खलल की संभावना हो,

2.3 प्रत्येक निदेशक अथवा वरिष्ठ कार्यपालक को  अवश्य-

क) अपने किसी भी व्यक्तिगत या बाहरी  व्यवसाय के विषय में कंपनी को बिना हिचक सूचित करना चाहिए जिससे -

1)  सम्भाव्य या  अवश्यम्भावी दायित्व में मतभेद या दायित्व-पूर्ति में   खलल  हो,

2)             एक सम्भाव्य या अवश्यम्भावी दायित्व में मतभेद या दायित्व-पूर्ति में  खलल की संभावना हो,

ख)   किसी स्वतंत्र कानूनी सलाहकार से सलाह लें ताकि दायित्व में मतभेद या दायित्व-पूर्ति में  खलल की संभावना से निबट सकें।

2.4 प्रत्येक निदेशक को -

क)   ऐसे किसी मामले में भाग नहीं लेना चाहिए जिससे  उनके दायित्व में मतभेद या दायित्व-पूर्ति में  खलल की संभावना हो।

ख)   अपने भौतिक विवरण के खुलासे के मामले में कंपनी अधिनियम, 1956  तथा लिस्टिंग एग्रीमेन्ट के  प्रावधानों का अनुपालन करें।

2.5 प्रत्येक निदेशक को बोर्ड को सूचित करना चाहिए कि -

क) किसी अन्य संस्था के साथ कोई अन्य पद अथवा निदेशक की हैसियत से उनका जुड़ाव, तथा

ख)   किसी अन्य संस्था के साथ उनका निदेशक अथवा वरिष्ठ कार्यपालक की हैसियत में प्रस्तावित जुड़ाव।

2.6 जब तक लिखित रूप से कंपनी को सूचित नहीं किया गया हो, संस्थान की संपत्ति, सूचना अथवा पद के आधार पर के माध्यम से अपने किसी भी अतिरिक्त व्यक्तिगत लाभ से  प्रत्येक निदेशक तथा वरिष्ठ कार्यपालक को बचना चाहिए।


3    नियमों, अधिनियमों, नीतियों तथा पद्धति का अनुपालन

प्रत्येक निदेशक तथा वरिष्ठ कार्यपालक को अवश्य -

क)   किसी भी जारी कानून, नियम तथा अधिनियम का पालन करना चाहिए।

ख)   कंपनी के प्रोटोकॉल, नीतियों तथा पद्धतियों का अनुपालनकरना चाहिए।

ग)    अन्य ऑफिसरों को इसी प्रकार काम करने हेतु प्रोत्साहित करना चाहिए।

4. गोपनीयता

4.1 किसी भी कार्य को करते समय किसी भी  निदेशक तथा वरिष्ठ कार्यपालक द्वारा प्राप्त सूचना गोपनीय होती है, जिन्हें उचित स्थान के अलावा किसी भी अन्य स्थान पर प्रकाशित नहीं किया जाना चाहिए, बशर्ते वह -

क)   बोर्ड द्वारा अधिकृत हों,

ख)   किसी कानून अथवा कानूनी  संस्था द्वारा मांगी गई हो।

4.2         बोर्ड तथा प्रबंधन के अस्तित्व तथा विवरण की सूचना, चर्चाओं तथा निर्णय, जिन्हें आम रूप  से प्रकाशित नहीं किया गया हो तथा बोर्ड द्वारा प्रकाशित नहीं किया गया हो, गोपनीय सूचनाएं  हैं तथा उन पर पैरा 4.1 के प्रावधान लागू होते हैं।

4.3         कंपनी त्याग करने बाद भी प्रत्येक निदेशक तथा वरिष्ठ कार्यपालक पर गोपनीयता की शपथ लागू होती है।

 
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