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तकनीकी नवीकरण

खनन, शोधन, सांद्रीकरण, हाइड्रोमेटलर्जी एवं सह-उत्पादों की प्राप्ति में तकनीकी विकास के क्षेत्र में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड के कुछ प्रमुख योगदान रहे हैं। हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड द्वारा नई तकनीकी का प्रयोग प्रारम्भ किए जाने वाले निम्नलिखित कुछ क्षेत्र हैं -

खनन

ट्रैकलेस खनन

ट्रैकलेस खनन से खानों के तेजी से विकास करने तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तरों के समतुल्य उच्च स्तर के उत्पादन एवं उत्पादकता प्राप्त करने में सहायता मिली है।

ड्रॉप रेजिंग

खनन प्रचालन में सबसे कठिन कार्यों में से एक है रेजिंग । एचसीएल ने 60 मी. के अंतराल पर ड्रॉप रेजिंग को विकसित कर इसमें महारत प्राप्त कर ली है । इससे अधिक सुरक्षा एवं प्रगति प्राप्त ही है। रेज़ेस की क्रमानुसार क्रेटर ब्लास्टिंग के तरीके में पाँच 6” के छिद्र बनाने के तरीके को मानकीकृत किया गया है।

बड़े आयतन वाली ब्लास्ट होल स्टोपिंग

एचसीएल ने स्टोपिंग के एक उप-स्तरीय (सब-लेवेल) स्टोपिंग की विधि का विकास किया है, जिसमें विभिन्न स्तरों में 50 से 60 मीटरों के अंतराल पर बड़े आकार (162 मि.मि.) के ब्लास्ट होल (छिद्र) का उपयोग किया जाता है। इस विधि में उप-स्तरों पर ड्रिलिंग की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है। इससे बहुत ही अच्छा फ्रैगमेन्टेशन मिलता है। नई स्टोपिंग विधि से  परम्परागत उप-स्तरीय स्टोपिंग की तुलना में प्राप्त अधिक लाभ के वर्णन निम्नलिखित हैं -

  • डेवेलपमेन्ट की मात्रा, ड्रिलिंग के खर्च एवं विस्फोटकों पर व्यय में कमी,
  • खनन के कुल व्यय में कमी,
  • मानव संसाधनों का कम उपयोग एवं
  • स्टोप्‍स बनाने की तैयारी के समय की बचत । स्टोपिंग की इस विधि से खनन प्रौद्योगिकी में क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं।

रॉक बोल्टिंग

पहले अयस्क भण्डारों के फ्लैट डिपिंग प्रकार के खनन करने के लिए लकड़ी के लट्ठों का सहारा बना कर काम करना पड़ता था । पर बड़े क्षेत्र में खनन करने की आवश्यकताओं के मद्देनज़र, एचसीएल ने सीमेन्ट ग्राउटेड स्टील रॉडों के प्रयोग कर काम करने का एक सरल एवं प्रभावी तरीका विकसित किया है । इससे जमीनी परिस्थिति में सुधार हुआ है तथा सुरक्षा मापदण्डों में सुधार सुनिश्चित हुआ है।

पोस्ट पिलर स्टोपिंग

आईसीसी की खानों में गहराईयों में चौड़ाई में फैले अयस्कों के खनन-कार्य में अपनाए जाने के लिए एचसीएल ने पोस्ट पिलर खनन का तरीका विकसित किया है । खनन के इस तरीके से रूम एण्ड पिलर स्टोप्स तरीके की तुलना में उत्पादन की दरों को बढ़ाने में हमें सहायता मिली  है । आईसीसी में इन स्टोप्स के प्रचालन के लिए इलेक्ट्रिक प्रचालित एलएचडी का उपयोग किया गया है । इससे प्रति व्यक्ति प्रति शिफ्ट उत्पादन बढ़ा है तथा स्टोपिंग का व्यय काफी घटा है । आईसीसी में श्रेणीकृत मिल टेलिंग्स से स्टोप्स की हाइड्रॉलिक फिलिंग के तरीके को मापदण्ड के तौर पर स्थापित किया गया है, जिससे क्षेत्रीय जमीनी स्थिति में सुधार हुआ है।

स्मेल्टिंग (प्रगालन)

ऑक्सीकरण बढ़ाना

एचसीएल ने केसीसी एवं आईसीसी के कन्वर्टरों में ऑक्सीकरण बढ़ाने की दिशा में पहल की है, जिससे प्रगालन के दौरान अन्य उत्पादों के जमाव होने पर नियंत्रण करने में सहायता मिली है । एचसीएल ने फ्लैश फर्नेसों में जाने वाली प्रोसेस की हवा में ऑक्सीजन की मात्रा में वृद्धि करके प्रगालकों से अधिक उत्पादन लक्ष्यों की आपूर्ति की दिशा में प्रभावी कदम स्थापित किया है।

हाइड्रो-मेटलर्जी

मलंजखण्ड में बड़ी मात्रा में ऑक्सीडाइजड अयस्कों एवं निम्न श्रेणी के सल्फाइड अयस्कों के पाए जाने के कारण कम्पनी  को वहाँ पर अयस्कों से तांबे की प्राप्ति के लिए डम्प लीचिंग विधि अपनानी पड़ी है, अन्यथा अन्य परम्परागत तरीके वहाँ पर मंहगे साबित हो रहे थे। इस विधि में अयस्कों के डम्प (स्तूप) पर कम घनत्व का एसिडिक 9अम्लीय) घोल का छिड़काव किया जाता है ताकि तांबे के खनिज में घुल जाए । लीचिंग विधि के फलस्वरूप मिलने वाला उत्पाद कॉपर सल्फेट (तूतिया) का घोल होता है। इस घोल में से अन्य प्रक्रियाओं के माध्यम से परिशुद्ध तांबा धातु को प्राप्त किया जाता है।

सह-उत्पादों की पुन

प्राप्ति
 केसीसी एवं आईसीसी में एचसीएल की आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित अनुसंधान एवं विकास (आर एण्ड डी) की सुविधाएँ हैं । आर एण्ड डी विभाग का कार्य होता है उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ाना, कच्चे माल की गुणवत्ता पर नियंत्रण रखना, रिकवरियों (पुन: प्राप्तियों) को बढ़ाना तथा सह-उत्पादों की रिकवरी को अधिकतम करना । एचसीएल ने मूल्यवान धातुओं की प्राप्ति के लिए अपने प्लाण्ट को विकसित किया है, जो कि आईसीसी में सफलतापूर्वक चल रहा है। आर एण्ड डी विभाग द्वारा एक टेलुरियम रिकवरी प्लाण्ट विकसित किया गया है। कन्वर्टर स्लैग में से कोबाल्ट, निकल एवं तांबे के पाउडर की रिकवरी के लिए विस्तृत तौर पर कार्य किया जा रहा है। स्लैग में से हानि को कम करने की दिशा में प्रयास हो रहे हैं ।

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